प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कृषि विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपए का एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लॉन्च किया है। इसके अलावा पीएम-किसान योजना की छठी किस्त के तहत साढ़े आठ करोड़ किसानों के खातों में 17 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने में यह योजना महत्वपूर्ण साबित होगी।
क्या है एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड?
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 जुलाई को एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को मंजूरी दी थी। इसे ही एक महीने के भीतर रविवार को पीएम ने लॉन्च किया है। योजना 10 साल के लिए रहेगी।
- यह फंड कटाई के बाद फसल प्रबंधन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और कम्युनिटी के लिए एग्रीकल्चर असेट्स बनाने के लिए लोन देगा। इनमें कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट्स शामिल हैं।
- इस योजना में शामिल होने के लिए 12 में से 11 सरकारी बैंकों ने पहले ही एमओयू पर साइन कर लिए हैं। इस वर्ष में 10 हजार करोड़ रुपए का लोन देंगे। अगले तीन वित्त वर्ष में 30-30 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया जाएगा।
- इस फंड स्कीम के तहत लोन पर सालाना ब्याज में 3 फीसदी छूट दी जाएगी। यह छूट अधिकतम 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर होगी। ब्याज छूट का लाभ ज्यादा से ज्यादा 7 साल तक मिलेगा।
इससे किसानों और ग्रामीण इलाकों को क्या लाभ होगा?
- यह योजना मूल रूप से किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य से जुड़ी हुई है। इस योजना के तहत किसानों को लाभ पहुंचाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा। ताकि उन्हें अपनी उपज के लिए अधिक कीमत मिल सके।
- इसकी मदद से किसान उपज रखने के लिए गोदाम बनाने, उपज को ऊंचे मूल्यों पर बेचने, फसल की बर्बादी कम करने और प्रोसेसिंग व वैल्यू एडिशन के लिए सक्षम हो सकेंगे।
- इस फंडिंग के तहत रि-पेमेंट में छह महीने से दो साल तक किस्तें चुकाने में छूट मिल सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्यमी भी भाग लेंगे। इसके लिए औपचारिक कर्ज उपलब्ध होगा। रोजगार के नए अवसर सामने आएंगे।
इसकी जरूरत क्यों महसूस हुई?
- लंबे अरसे से मांग उठ रही थी कि गांव में उद्योग क्यों नहीं लगा सकते। इससे किसानों को अपना माल बेचने की आजादी मिल सकेगी। उनकी लागत कम होगी और उनका लाभ बढ़ेगा।
- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत जो भी योजनाएं तैयार हो रही हैं, उनके केंद्र में छोटा किसान है। सारी मुसीबतें उसी पर आती हैं। दो दिन पहले ही उनके लिए योजना की शुरुआत की थी।
- देश की पहली किसान रेल महाराष्ट्र-बिहार में शुरू हो चुकी है। महाराष्ट्र से संतरा, फल, प्याज लेकर ट्रेन बिहार आएगी। वहां से लीची, मखाने, सब्जियां लेकर लौटेगी। फायदा दोनों तरफ के किसानों को होगा।
- यह किसान ट्रेन पूरी तरह से एयर कंडीशंड है। यानी यह पटरी पर दौड़ता हुआ कोल्ड स्टोरेज है। इस ट्रेन से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के किसानों को भी सीधे-सीधे फायदा होगा।
इस स्कीम के तहत कौन ले सकेगा लोन?
- प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटी, मार्केटिंग कोऑपरेटिव सोसायटी, फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन, स्व-सहायता समूह, किसान, जॉइंट लाइबिलिटी ग्रुप को लोन मिल सकेगा।
- इसके अलावा, मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसायटी, कृषि उद्यमी, स्टार्ट-अप, कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स और और केंद्रीय/राज्य एजेंसी या लोकल बॉडी प्रायोजित पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप प्रोजेक्ट को भी फंडिंग मिलेगी।
कौन करेगा इस स्कीम का मैनेजमेंट?
- एग्रीकल्चर इंफ्रा फंड के मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग का काम ऑनलाइन मैनेजमेंट इंफर्मेशन सिस्टम प्लेटफार्म पर होगा। इसके तहत आवेदन देने वाली संस्थाओं को आवेदन करने में सक्षम बनाएगा।
- यह ऑनलाइन प्लेटफार्म कई बैंकों ब्याज दरों में पारदर्शिता जैसे लाभ देगा। इसके अलावा ब्याज में छूट, क्रेडिट गारंटी, न्यूनतम दस्तावेज, मंजूरी की तेज प्रक्रिया के साथ-साथ अन्य योजनाओं के लाभ मिल सकेंगे।
- नेशनल, स्टेट और डिस्ट्रिक्ट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएंगी। ताकि रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सके और इफेक्टिव फीडबैक हासिल किया जा सके। इस स्कीम की अवधि दस वर्ष की रहेगी।
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